महेंद्र जी
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महेन्द्र श्रीवास्तव29 July 2012 13:05 आधा सच
आप किसके साथ है ?
आपका शुभ चिन्तक
कमलेश
दिल है कि मानता नहीं?
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महेन्द्र श्रीवास्तव29 July 2012 13:05 आधा सच
"आज एक बार फिर जरूरी हो गया है कि टीम अन्ना की बात की जाए ।
वैसे
तो मेरा मानना है कि इनके बारे में बात करना सिर्फ समय बर्बाद करना है,
लेकिन दिल्ली में जो माहौल है, उसमें जरूरी हो गया है कि कुछ बातें कर ली
जाए।"
"आपके रामदेव हों या फिर अन्ना मैं इनके खिलाफ नहीं हूं.
बल्कि इनके ड्रामेबाजी के खिलाफ हूं..." )
आपको धन्यवाद,
समाचार देखने का तो समय नहीं होता मेरे पास पर आपका लेख पढने के बाद समाचार देखने की जरूरत नहीं, पर इसमें कितनी सच्चाई है यह आप ही जाने I
आपकी भाषा-शैली से दुर्भावना झलकती है ("आपके रामदेव हों या फिर अन्ना")
ऐसी भाषा पत्रकारिता का कोढ़ है I उनके कार्य करने का तरीका गलत हो सकता है
पर कार्य करने के पीछे की भावना गलत नहीं है I निशचय ही जिस सरकार के
प्रधान मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा हो, उसके सामने अनशन नहीं किया
जाता I आन्दोलन "भ्रष्टाचारियो सत्ता छोड़ो" होना चाहिए था I संसद में बैठे
इमानदार सांसदों से यह अपील होनी चाहिए थी कि वह भ्रष्ट सरकार को गिरा दें
और अगर इमानदार सांसद अपना यह उत्तर दायित्व पूरा नहीं करते तो पूरे देश
की जनता से यह अपील की जानी चाहिए थी कि इन सांसदों में से और न इन सांसदों
के रिश्तेदारों में से, किसी को भी पुनह संसद में न पहुचने दें I निरंकुश
व्यवस्था इमानदार को भी बेईमान बना देती है, तो इमानदार व्यक्ति लायेगे
कहाँ से I इसलिए आवश्यकता है अंकुश लगाने की और सारी उर्जा इसी पर लगायी
जानी चाहिए थी न कि सत्ता पर काविज होने में I
अन्ना और रामदेव न मेरे हैं न तेरे, हम सबके हैं I उस परम पिता परमेश्वर की तरफ से भेजे गए पैगम्बर हैं ! जितनी पुस्तके आपने पढ़ी होगी उतनी पुस्तके अन्ना और रामदेव ने नहीं पढ़ी हैं, फिर भी उनके पीछे पढ़े लिखो की भीड़ चलती है I क्योकि उनकी बातो में सरलता है और आज कल इस धरती पर सरल होना सबसे कठिन कम है I इसलिए उनके इस कठिन कम में हम सबको सहयोग करना चाहिए I कम से कम बुद्दिमता का प्रयोग भी यदि सकारात्मक रूप से किया जाता है तो मानव देव तुल्य हो जाता है और नकारात्मक रूप से किया जाये तो मनुष्य दानव तुल्य हो जाता है I संसद पर बुद्धजीवी दानवो का अधिपत्य है !
अन्ना और रामदेव न मेरे हैं न तेरे, हम सबके हैं I उस परम पिता परमेश्वर की तरफ से भेजे गए पैगम्बर हैं ! जितनी पुस्तके आपने पढ़ी होगी उतनी पुस्तके अन्ना और रामदेव ने नहीं पढ़ी हैं, फिर भी उनके पीछे पढ़े लिखो की भीड़ चलती है I क्योकि उनकी बातो में सरलता है और आज कल इस धरती पर सरल होना सबसे कठिन कम है I इसलिए उनके इस कठिन कम में हम सबको सहयोग करना चाहिए I कम से कम बुद्दिमता का प्रयोग भी यदि सकारात्मक रूप से किया जाता है तो मानव देव तुल्य हो जाता है और नकारात्मक रूप से किया जाये तो मनुष्य दानव तुल्य हो जाता है I संसद पर बुद्धजीवी दानवो का अधिपत्य है !
आप किसके साथ है ?
कमलेश
बल्कि इनके ड्रामेबाजी के खिलाफ हूं...