कैसे हैं महेंद्र जी?
आज अन्ना जी से खफा है क्या ? या उनकी टीम से ?
आपकी सकारात्मक सोच में नकारात्मकता झलकती है !
आप पर कांग्रेसी होने के आरोप लगे, अच्छा है ! अब आप अकेले तो नहीं!
रह गई बात अन्ना टीम के काम करने की, तो वो चिर-परिचित रणनीति पर काम नहीं कर रही ! और आप उसके काम करने को पुरानी रणनीति से जोड़ कर देख रहे है यह आप का दोष है उनका नहीं ?
किसी भी युद्ध में न तो पुराने हथियार काम में आते है और न पुरानी रणनीति, हर बार यह यूनिक होता है ! पुरानी रणनीति मार्ग दर्शक हो सकती है, आगे का नया मार्ग वनाने में, पर वो कभी भी वैसी नहीं होती जैसी पहले थी ! इतिहास जानता है और आप भी कि गाँधी जी का कोई भी आन्दोलन सफल नहीं हुआ I समाज को वो कुछ नया दे सके तो वह था शासक के प्रति नयी सोच, कि अहिंसा से भी सत्ता कि सोच में परिवर्तन हो सकता है किन्तु गाँधी जी इसमें भी पूर्ण सफल नहीं हुए, रह गई भारत की आजादी की बात तो इसका श्रेय जाता है द्वितीय विश्वयुद्ध को और संयुक्त राष्ट्र संघ के १९४५ के चाटर को जिसने ब्रिटिश सरकार को कमजोर कर दिया ! गाँधी जी की इस नयी सोच को कांग्रेस ने आगे बढ़ाया, इसलिए नहीं की वे गाँधी जी के समर्थक थे बल्कि इसलिए कि यह सत्ता के सुरक्षित रहने का सिद्धांत था, और सत्ता को हिंसात्मक आन्दोलन से बचा सकता था !
आज आप भी जानते हो कि किसी के सामने गाल करोगे तो वो क्या करेगा ?
इसलिए अन्ना टीम पर बहस करके आप वास्तव में समय खराब कर रहे थे ! और मेरा भी कर दिया I
मै ऐसा सोचता हूँ जब तक हिंदुस्तान में रक्त क्रांति नहीं होगी कुछ भी नया परिवर्तन नहीं होने वाला है क्योंकि ब्रिटिश सरकार एक कंपनी के हित में कार्य करती और नीतियाँ वनाती थी आज की सरकार लगभग ५००० कंपनी के हित में कार्य करती और नीतियाँ वनाती है और यह कम्पनियां सरकार के मुलाजिमो के हित में काम करती है यही भ्रष्टाचार की टीम है, देखना है की पाप का घड़ा कब फूटता है ?
आपका शुभ चिन्तक
कमलेश

बल्कि इनके ड्रामेबाजी के खिलाफ हूं...