k.mittra30 June 2012 18:04
महेंद्र जी
पत्रकारिता के नियमो के विपरीत आपके इस लेख में भी दुराग्रह की छलक मिलती है
(इसलिए उन्होंने अपने " योग कारखाने " का नाम महर्षि पतंजलि रखा है। )
इस बाक्य की आवश्यकता नहीं थी !
आप लाख कोशिस कर लें, अपने इस लेख के बाद भी आप अपने को गैर-कांग्रेसी या गैर-बिका हुआ सावित नहीं कर सकते !
आप ने चर्चा शुरू की थी " बाबा रामदेव क्या है ? " और चर्चा शुरू हो गई है आप क्या है ?
इसलिए आप अपने मिसन में फेल हुए हो, आपने को सफल कहना आपकी न समझी है !
आप का शुभ चिन्तक
कमलेश
पत्रकारिता के नियमो के विपरीत आपके इस लेख में भी दुराग्रह की छलक मिलती है
(इसलिए उन्होंने अपने " योग कारखाने " का नाम महर्षि पतंजलि रखा है। )
इस बाक्य की आवश्यकता नहीं थी !
आप लाख कोशिस कर लें, अपने इस लेख के बाद भी आप अपने को गैर-कांग्रेसी या गैर-बिका हुआ सावित नहीं कर सकते !
आप ने चर्चा शुरू की थी " बाबा रामदेव क्या है ? " और चर्चा शुरू हो गई है आप क्या है ?
इसलिए आप अपने मिसन में फेल हुए हो, आपने को सफल कहना आपकी न समझी है !
आप का शुभ चिन्तक
कमलेश
कमलेश जी, आप लोगों के साथ दिक्कत यही है कि एक शब्द और लाइन पकड़ते हैं। पूरा लेख अपने समझने की कोशिश नहीं की। महर्षि पतंजलि का योग क्या था, बाबा का योग क्या है।
महर्षि के अष्टांग योग पर बाबा कितने खरे उतरते हैं, ये आप की समझ में नहीं आ रहा है। कल से ना जाने क्या क्या ब्लाग पर लिख रहे हैं, विषय पर बात नहीं कर सकते। बाबा अपने को युग पुरुष और गांधी सुभाष बन रहे हैं, मै क्या हूं, मैने तो ऐसा कुछ दावा नहीं किया। मैं तो कुछ जानने की कोशिश कर रहा हूं, पर बाबा के चेले मुझे जानने दें तब ना। मेरा मिशन नहीं है, मेरा मकसद सच लोगों तक पहुंचाना भर है। और वो मैं करता रहूंगा, मैं धमकी और गाली गलौच से विचलित होने वाला नहीं हूं। रही बात पत्रकारिता की तो वो आपकी समझ से बाहर है, कृपया बाबा तक ही सीमित रहें ।
महर्षि के अष्टांग योग पर बाबा कितने खरे उतरते हैं, ये आप की समझ में नहीं आ रहा है। कल से ना जाने क्या क्या ब्लाग पर लिख रहे हैं, विषय पर बात नहीं कर सकते। बाबा अपने को युग पुरुष और गांधी सुभाष बन रहे हैं, मै क्या हूं, मैने तो ऐसा कुछ दावा नहीं किया। मैं तो कुछ जानने की कोशिश कर रहा हूं, पर बाबा के चेले मुझे जानने दें तब ना। मेरा मिशन नहीं है, मेरा मकसद सच लोगों तक पहुंचाना भर है। और वो मैं करता रहूंगा, मैं धमकी और गाली गलौच से विचलित होने वाला नहीं हूं। रही बात पत्रकारिता की तो वो आपकी समझ से बाहर है, कृपया बाबा तक ही सीमित रहें ।
महेंद्र मेरे भाई
खाना बनाते समय सब्जी में एक आइटम कम या ज्यादा हो जाये तो पूरा खाना खराब हो जाता है!
आलोचनाओ पर आलोचनाये ही होती है ! शव्द शैली लेखक ज्ञान और धैर्य पर निर्भर करती है ! आप समालोचना क्यों नहीं कर रहे है ?
आप आधा सच ही क्यों लिख रहे है ? पूरा सच क्यो नहीं लिख रहे है !
आप का शुभ चिन्तक
कमलेश
ReplyDeleteखाना बनाते समय सब्जी में एक आइटम कम या ज्यादा हो जाये तो पूरा खाना खराब हो जाता है!
आलोचनाओ पर आलोचनाये ही होती है ! शव्द शैली लेखक ज्ञान और धैर्य पर निर्भर करती है ! आप समालोचना क्यों नहीं कर रहे है ?
आप आधा सच ही क्यों लिख रहे है ? पूरा सच क्यो नहीं लिख रहे है !
आप का शुभ चिन्तक
कमलेश
